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Matsyavataar

मत्स्यावतार (Matsyavataar)

मत्स्यावतार 

मत्स्य” एक संस्कृत शब्द है, जिसका हिंदी अर्थ है “मछली ” और अंग्रेजी में  इसे “fish” कहते हैं। मत्स्यावतार भगवान विष्णु के दस अवतारों  में से एक है।  

मत्स्यावतार में भगवान विष्णु ने संयुक्त रूप से मानव तथा मछली  के रूप में अवतार लिया था, जिसमें उनके शरीर का ऊपरी भाग मनुष्य का तथा निचला भाग मछली का था।  

मत्स्यावतार में मुख्यतः भगवान विष्णु को चार हाथों  के साथ दर्शाया गया है, जिसमें उनके एक हाथ में शंख, एक में  चक्र, एक हाथ वरदान देने की मुद्रा में तथा एक अभय मुद्रा (रक्षा – पोषण मुद्रा ) में है।   इस अवतार में  भगवान विष्णु को सभी आभूषणों से सुसज्जित दिखाया गया है।  

वैसे तो विभिन्न पुराणों  में कहानी के कई संस्करण पाए गए है, लेकिन सबसे  लोकप्रिय कहानी भगवत पुराण में वर्णित है। 

इस कहानी के अनुसार भगवान विष्णु ने एक बहुत विशाल बाढ़ के बाद पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता को सुनिश्चित करने तथा वेदों और पवित्र ग्रंथों को हयग्रीव नामक राक्षस से बचाने के लिए मत्स्य के रूप में अवतार लिया था। 

भारत में लाखों वर्ष पहले एक बहुत ही महान राजा थे जिनका नाम सत्यव्रत (मनु )था।  वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे। 

एक दिन वे कृतमाला नदी में अपने दोनों हाथों में पानी भरकर भगवान को अर्घ्य दे रहे थे, तभी उन्होंने अपने हाथों में एक  छोटी सुनहरी मछली को देखा  जो उनसे नदी की बड़ी  मछलियों से सुरक्षा मांग रही है।  

राजा ने अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए उस मछली को अपने साथ ले गए और उस मछली को पानी से भरे हुए एक छोटे से बर्तन में डाल दिया। 

परन्तु जल में डालते हुए ही उस मछली का आकार बढ़ने लगा, यह  देखते ही राजा ने उस मछली को एक मटके में डाल दिया। 

उस मछली  का आकार पुनः बढ़ने लगा तो राजा ने उसे एक कुंए में डलवा दिया। इसी तरह मछली का आकार निरंतर बढ़ता रहा , फिर राजा ने उसे पहले एक तालाब, उसके बाद एक नदी में डलवा दिया। 

परन्तु उस मछली का आकार इसी तरह निरंतर बढ़ता रहा फिर राजा ने उसे समुद्र में डालने का निर्णय लिया।  

जैसे ही  मछली को समुद्र में डाला गया , भगवान विष्णु आधी मछली और आधे  मानव रूप में उनके सामने प्रकट हो गए। 

उन्होंने राजा को बताया कि आज से सातवें दिन महाप्रलय होगा और उन्हें एक विशाल नाव जिसमें कुछ जड़ी – बूटियों , पौधों के बीजों ,  कुछ जीवित प्राणियों , कीड़ों तथा जानवरों की जोड़ियों को  तैयार रखने  के लिए कहा। 

भगवान विष्णु ने कहा आज से सातवें दिन वे  मत्स्य के रूप में उन्हें उस महाप्रलय से बाहर निकालेंगे। 

भगवान विष्णु के आदेशांनुसार राजा सत्यव्रत ने सभी जीवित चीजों के साथ नाव को तैयार रखा।  इसी बीच मूसलाधार बारिश ने पूरी पृथ्वी को पानी से भर दिया और भीषण जलप्रलय शुरू हो गया।  

तब , भगवान विष्णु मत्स्य (मछली) के रूप में उनके सामने प्रकट हुए और उन्होंने राजा को  वासुकी नाग को रस्सी के रूप में उपयोग कर मछली के सींग में बाँधने के लिए कहा।   इसके बाद मछली उन्हें एक सुरक्षित स्थान (मलाया पर्वत) पर ले गयी।  

मत्स्यावतार के रूप में भगवान विष्णु ने प्रलय के बाद के युग में जीवित रहने के लिए सभी आवश्यक ज्ञान राजा सत्यव्रत को प्रदान किया और गायब हो गए।  

राजा सत्यव्रत ने  भगवान विष्णु के आदेशों का पालन करते हुए जलप्रलय से बचे लोगों को आवश्यक ज्ञान प्रदान किया और धर्म की पुनः स्थापना की।  

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